हिंदी पहेलियाँ

वो कौन सी चीज़ है जिसे खाने के लिए खरीदते हैं लेकिन उसे खाते नहीं लगाओ दिमाग ??? फेल हो गए क्या खुली रात में पैदा होती हरी घास पर सोती हूँ मोती जैसी मूरत मेरी बादल की मैं पोती हूँ बताओ क्या ? खुशबू है पर फूल नहीं जलती है पर ईर्ष्या नहीं बताओ क्या ? प्यास लगे तो पी लेना भूख लगे तो खा लेना ठण्ड लगे तो जला लेना बोलो क्या ? हरे रंग की टोपी मेरी हरे रंग का है दुशाला जब पक जाती हूँ मैं तो हरे रंग की टोपी लाल रंग का होता दुशाला… Read More »

😜😜😂😂😂😁😁 हा हा हा हा हा हा हा हा

😜😜😂😂😂😁😁 “गुप्ता जी के पड़ोस में सत्यनारायण कथा की आरती हो रही थी, आरती की थाली गुप्ता जी के सामने आने पर, गुप्ता जी ने अपनी जेब में से छाँट कर कटा फटा दस रूपये का नोट कोई देखे नहीं, ऐसे डाला । वहाँ अत्यधिक ठसाठस भीड़ थी । गुप्ता जी के कंधे पर ठीक पीछे वाली आंटी ने थपकी मार कर गुप्ता जी की ओर 2000 रूपये का नोट बढ़ाया । गुप्ता जी ने उनसे नोट ले कर आरती की थाली में डाल दिया । गुप्ता जी को अपने 10 रूपये डालने पर थोड़ी लज्जा भी आई । बाहर… Read More »

नाग-पूजा- प्रेमचंद की कहानियाँ

प्रात:काल था। आषढ़ का पहला दौंगड़ा निकल गया था। कीट-पतंग चारों तरफ रेंगते दिखायी देते थे। तिलोत्तमा ने वाटिका की ओर देखा तो वृक्ष और पौधे ऐसे निखर गये थे जैसे साबुन से मैने कपड़े निखर जाते हैं। उन पर एक विचित्र आध्यात्मिक शोभा छायी हुई थी मानों योगीवर आनंद में मग्न पड़े हों। चिड़ियों में असाधारण चंचलता थी। डाल-डाल, पात-पात चहकती फिरती थीं। तिलोत्तमा बाग में निकल आयी। वह भी इन्हीं पक्षियों की भॉँति चंचल हो गयी थी। कभी किसी पौधे की देखती, कभी किसी फूल पर पड़ी हुई जल की बूँदो को हिलाकर अपने मुँह पर उनके शीतल… Read More »

शंखनाद- प्रेमचंद की कहानियाँ

भानु चौधरी अपने गॉँव के मुखिया थे। गॉँव में उनका बड़ा मान था। दारोगा जी उन्हें टाटा बिना जमीन पर न बैठने देते। मुखिया साहब को ऐसी धाक बँधी हुई थी कि उनकी मर्जी बिना गॉँव में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। कोई घटना, चाहे, वह सास-बहु का विवाद हो, चाहे मेड़ या खेत का झगड़ा, चौधरी साहब के शासनाधिकारी को पूर्णरुप से सचते करने के लिए काफी थी, वह तुरन्त घटना स्थल पर पहुँचते, तहकीकात होने लगती गवाह और सबूत के सिवा किसी अभियोग को सफलता सहित चलाने में जिन बातों की जरुरत होती है, उन सब… Read More »

पंच परमेश्वर- प्रेमचंद की कहानियाँ

     जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, तो जुम्मन पर अपना घर छोड़ देते थे। उनमें न खाना-पाना का व्यवहार था, न धर्म का नाता; केवल विचार मिलते थे। मित्रता का मूलमंत्र भी यही है।      इस मित्रता का जन्म उसी समय हुआ, जब दोनों मित्र बालक ही थे, और जुम्मन के पूज्य पिता, जुमराती, उन्हें शिक्षा प्रदान करते थे।… Read More »

बड़े घर की बेटी- प्रेमचंद की कहानियाँ

बेनीमाधव सिंह गौरीपुर गॉँव के जमींदार और नम्बरदार थे। उनके पितामह किसी समय बड़े धन-धान्य संपन्न थे। गॉँव का पक्का तालाब और मंदिर जिनकी अब मरम्मत भी मुश्किल थी, उन्हीं के कीर्ति-स्तंभ थे। कहते हैं इस दरवाजे पर हाथी झूमता था, अब उसकी जगह एक बूढ़ी भैंस थी, जिसके शरीर में अस्थि-पंजर के सिवा और कुछ शेष न रहा था; पर दूध शायद बहुत देती थी; क्योंकि एक न एक आदमी हॉँड़ी लिए उसके सिर पर सवार ही रहता था। बेनीमाधव सिंह अपनी आधी से अधिक संपत्ति वकीलों को भेंट कर चुके थे। उनकी वर्तमान आय एक हजार रुपये वार्षिक… Read More »

दुर्गा का मंदिर- प्रेमचंद की कहानियाँ

बाबू ब्रजनाथ कानून पढ़ने में मग्न थे, और उनके दोनों बच्चे लड़ाई करने में। श्यामा चिल्लाती, कि मुन्नू मेरी गुड़िया नहीं देता। मुन्नु रोता था कि श्यामा ने मेरी मिठाई खा ली।      ब्रजनाथ ने क्रुद्घ हो कर भामा से कहा—तुम इन दुष्टों को यहॉँ से हटाती हो कि नहीं? नहीं तो मैं एक-एक की खबर लेता हूँ।      भामा चूल्हें में आग जला रही थी, बोली—अरे तो अब क्या संध्या को भी पढ़तेही रहोगे? जरा दम तो ले लो।      ब्रज०–उठा तो न जाएगा; बैठी-बैठी वहीं से कानून बघारोगी ! अभी एक-आध को पटक दूंगा, तो वहीं से गरजती… Read More »

आत्माराम- प्रेमचंद की कहानियाँ

 वेदों-ग्राम में महादेव सोनार एक सुविख्यात आदमी था। वह अपने सायबान में प्रात: से संध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खटखट किया करता था। यह लगातार ध्वनि सुनने के लोग इतने अभ्यस्त हो गये थे कि जब किसी कारण से वह बंद हो जाती, तो जान पड़ता था, कोई चीज गायब हो गयी। वह नित्य-प्रति एक बार प्रात:काल अपने तोते का पिंजड़ा लिए कोई भजन गाता हुआ तालाब की ओर जाता था। उस धँधले प्रकाश में उसका जर्जर शरीर, पोपला मुँह और झुकी हुई कमर देखकर किसी अपरिचित मनुष्य को उसके पिशाच होने का भ्रम हो सकता था। ज्यों… Read More »

चुटकुले नये नये

मै होटल में नाश्ता करने गया सभी कपल सीट पर बैठे थे बैठने के लिए जगह ही नहीं थी जेब से फोन निकाला जोर से बोला तेरी गर्लफ्रेंड यहा दूसरे के साथ बैठी है तू जल्दी आ कसम से आधी लडकियां गायब हो गई… 😉😉😉😉😉😉😉😉😉 मास्टर – बेटा कोई प्यार वाली शायरी सुनाओ. छात्र – “मोटा मरता मोटी पे, भूखा मरता रोटी पे, मास्टरजी की है दो बेटी और मै मरता हूँ छोटी पे!!!” मास्टर जी बेहोश. 😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀 पप्पू ने ब्लड टेस्ट करवाया रिजल्ट आया A+ सोच कर बड़ा अचरज हुआ कि साली कामयाबी तो रग रग में दौड़ रही… Read More »