आत्माराम- प्रेमचंद की कहानियाँ

 वेदों-ग्राम में महादेव सोनार एक सुविख्यात आदमी था। वह अपने सायबान में प्रात: से संध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खटखट किया करता था। यह लगातार ध्वनि सुनने के लोग इतने अभ्यस्त हो गये थे कि जब किसी कारण से वह बंद हो जाती, तो जान पड़ता था, कोई चीज गायब हो गयी। वह नित्य-प्रति एक बार प्रात:काल अपने तोते का पिंजड़ा लिए कोई भजन गाता हुआ तालाब की ओर जाता था। उस धँधले प्रकाश में उसका जर्जर शरीर, पोपला मुँह और झुकी हुई कमर देखकर किसी अपरिचित मनुष्य को उसके पिशाच होने का भ्रम हो सकता था। ज्यों… Read More »

चुटकुले नये नये

मै होटल में नाश्ता करने गया सभी कपल सीट पर बैठे थे बैठने के लिए जगह ही नहीं थी जेब से फोन निकाला जोर से बोला तेरी गर्लफ्रेंड यहा दूसरे के साथ बैठी है तू जल्दी आ कसम से आधी लडकियां गायब हो गई… 😉😉😉😉😉😉😉😉😉 मास्टर – बेटा कोई प्यार वाली शायरी सुनाओ. छात्र – “मोटा मरता मोटी पे, भूखा मरता रोटी पे, मास्टरजी की है दो बेटी और मै मरता हूँ छोटी पे!!!” मास्टर जी बेहोश. 😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀 पप्पू ने ब्लड टेस्ट करवाया रिजल्ट आया A+ सोच कर बड़ा अचरज हुआ कि साली कामयाबी तो रग रग में दौड़ रही… Read More »

बेताल पच्चीसी – अंतिम कहानी – 25

योगी राजा को और मुर्दे को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। बोला, “हे राजन्! तुमने यह कठिन काम करके मेरे साथ बड़ा उपकार किया है। तुम सचमुच सारे राजाओं में श्रेष्ठ हो।” इतना कहकर उसने मुर्दे को उसके कंधे से उतार लिया और उसे स्नान कराकर फूलों की मालाओं से सजाकर रख दिया। फिर मंत्र-बल से बेताल का आवाहन करके उसकी पूजा की। पूजा के बाद उसने राजा से कहा, “हे राजन्! तुम शीश झुकाकर इसे प्रणाम करो।” राजा को बेताल की बात याद आ गयी। उसने कहा, “मैं राजा हूँ, मैंने कभी किसी को सिर नहीं झुकाया। आप पहले सिर… Read More »

माँ-बेटी – बेताल पच्चीसी – 24

किसी नगर में मांडलिक नाम का राजा राज करता था। उसकी पत्नी का नाम चडवती था। वह मालव देश के राजा की लड़की थी। उसके लावण्यवती नाम की एक कन्या थी। जब वह विवाह के योग्य हुई तो राजा के भाई-बन्धुओं ने उसका राज्य छीन लिया और उसे देश-निकाला दे दिया। राजा रानी और कन्या को साथ लेकर मालव देश को चल दिया। रात को वे एक वन में ठहरे। पहले दिन चलकर भीलों की नगरी में पहुँचे। राजा ने रानी और बेटी से कहा कि तुम लोग वन में छिप जाओ, नहीं तो भील तुम्हें परेशान करेंगे। वे दोनों… Read More »

शेर का भोजन? बेताल पच्चीसी – 22

कुसुमपुर नगर में एक राजा राज्य करता था। उसके नगर में एक ब्राह्मणथा, जिसके चार बेटे थे। लड़कों के सयाने होने पर ब्राह्मण मर गया औरब्राह्मणी उसके साथ सती हो गयी। उनके रिश्तेदारों ने उनका धन छीनलिया। वे चारों भाई नाना के यहाँ चले गये। लेकिन कुछ दिन बाद वहाँभी उनके साथ बुरा व्यवहार होने लगा। तब सबने मिलकर सोचा किकोई विद्या सीखनी चाहिए। यह सोच करके चारों चार दिशाओं में चलदिये। कुछ समय बाद वे विद्या सीखकर मिले। एक ने कहा, “मैंने ऐसी विद्यासीखी है कि मैं मरे हुए प्राणी की हड्डियों पर मांस चढ़ा सकता हूँ।“ दूसरेने कहा,… Read More »

शेर का भोजन? बेताल पच्चीसी – 22

कुसुमपुर नगर में एक राजा राज्य करता था। उसके नगर में एक ब्राह्मणथा, जिसके चार बेटे थे। लड़कों के सयाने होने पर ब्राह्मण मर गया औरब्राह्मणी उसके साथ सती हो गयी। उनके रिश्तेदारों ने उनका धन छीनलिया। वे चारों भाई नाना के यहाँ चले गये। लेकिन कुछ दिन बाद वहाँभी उनके साथ बुरा व्यवहार होने लगा। तब सबने मिलकर सोचा किकोई विद्या सीखनी चाहिए। यह सोच करके चारों चार दिशाओं में चलदिये। कुछ समय बाद वे विद्या सीखकर मिले। एक ने कहा, “मैंने ऐसी विद्यासीखी है कि मैं मरे हुए प्राणी की हड्डियों पर मांस चढ़ा सकता हूँ।“ दूसरेने कहा,… Read More »

  प्रेम में अंधा – बेताल पच्चीसी – 21

विशाला नाम की नगरी में पदमनाभ नाम का राजा राज करता था। उसी नगर में अर्थदत्त नाम का एक साहूकार रहता था। अर्थदत्त के अनंगमंजरी नाम की एक सुन्दर कन्या थी। उसका विवाह साहूकार ने एक धनी साहूकार के पुत्र मणिवर्मा के साथ कर दिया। मणिवर्मा पत्नी को बहुत चाहता था, पर पत्नी उसे प्यार नहीं करती थी। एक बार मणिवर्मा कहीं गया। पीछे अनंगमंजरी की राजपुरोहित के लड़के कमलाकर पर निगाह पड़ी तो वह उसे चाहने लगी। पुरोहित का लड़का भी लड़की को चाहने लगा। अनंगमंजरी ने महल के बाग़ मे जाकर चंडीदेवी को प्रणाम कर कहा, “यदि मुझे… Read More »

बालक की हँसी? बेताल पच्चीसी  -20

चित्रकूट नगर में एक राजा रहता था। एक दिन वह शिकार खेलने जंगल में गया। घूमते-घूमते वह रास्ता भूल गया और अकेला रह गया। थक कर वह एक पेड़ की छाया में लेटा कि उसे एक ऋषि-कन्या दिखाई दी। उसे देखकर राजा उस पर मोहित हो गया। थोड़ी देर में ऋषि स्वयं आ गये। ऋषि ने पूछा, “तुम यहाँ कैसे आये हो?” राजा ने कहा, “मैं शिकार खेलने आया हूँ। ऋषि बोले, “बेटा, तुम क्यों जीवों को मारकर पाप कमाते हो?” राजा ने वादा किया कि मैं अब कभी शिकार नहीं खेलूँगा। खुश होकर ऋषि ने कहा, “तुम्हें जो माँगना… Read More »

पिण्ड दान – बेताल पच्चीसी -19

वक्रोलक नामक नगर में सूर्यप्रभ नाम का राजा राज करता था। उसके कोई सन्तान न थी। उसी समय में एक दूसरी नगरी में धनपाल नाम का एक साहूकार रहता था। उसकी स्त्री का नाम हिरण्यवती था और उसके धनवती नाम की एक पुत्री थी। जब धनवती बड़ी हुई तो धनपाल मर गया और उसके नाते-रिश्तेदारों ने उसका धन ले लिया। हिरण्यवती अपनी लड़की को लेकर रात के समय नगर छोड़कर चल दी। रास्ते में उसे एक चोर सूली पर लटकता हुआ मिला। वह मरा नहीं था। उसने हिरण्यवती को देखकर अपना परिचय दिया और कहा, “मैं तुम्हें एक हज़ार अशर्फियाँ… Read More »

विद्या क्यों नष्ट हो गयी? बेताल पच्चीसी – 18

उज्जैन नगरी में महासेन नाम का राजा राज करता था। उसके राज्य में वासुदेव शर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था, जिसके गुणाकर नाम का बेटा था। गुणाकर बड़ा जुआरी था। वह अपने पिता का सारा धन जुए में हार गया। ब्राह्मण ने उसे घर से निकाल दिया। वह दूसरे नगर में पहुँचा। वहाँ उसे एक योगी मिला। उसे हैरान देखकर उसने कारण पूछा तो उसने सब बता दिया। योगी ने कहा, “लो, पहले कुछ खा लो।” गुणाकर ने जवाब दिया, “मैं ब्राह्मण का बेटा हूँ। आपकी भिक्षा कैसे खा सकता हूँ?” इतना सुनकर योगी ने सिद्धि को याद किया।… Read More »