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हंसो और हंसाओ

एक बार मै अपनी *सुन्दर पड़ोसन* के साथ पार्क में गया। हम एकान्त में बैठे। वो बोली: क्या करें? मैने कहा: एक चुटकुला सुनो: *चुटकुला* एक सन्यासी मन्दिर में सो रहा था। रात को एक सुन्दरी आकर उसके पास लेट गयी। सुबह को सन्यासी पछताया। जाकर अपने गुरु से बोला: बताइये, प्रायश्चित कैसे होगा? गुरु ने पूछा: तुमने सुन्दरी के साथ कुछ किया भी था? सन्यासी ने कहा: नहीं। गुरु बोले: दस दिन तक सुबह उठकर घास चरो। सन्यासी ने पूछा: ऐसा क्यों? गुरु ने कहा: इसलिये कि तुम गधे हो। *(समाप्त)* मेरी पड़ोसन खूब हंसी। बहुत देर बाद हम… Read More »

पांच पहेलियाँ -2

पहेली 1- तुम न बुलाओ मैं आ जाऊँगी, न भाड़ा न किराया दूँगी, घर के हर कमरे में रहूँगी, पकड़ न मुझको तुम पाओगे, मेरे बिन तुम न रह पाओगे, बताओ मैं कौन हूँ? पहेली 2- गर्मी में तुम मुझको खाते, मुझको पीना हरदम चाहते, मुझसे प्यार बहुत करते हो, पर भाप बनूँ तो डरते भी हो। पहेली 3 – मुझमें भार सदा ही रहता, जगह घेरना मुझको आता, हर वस्तु से गहरा रिश्ता, हर जगह मैं पाया जाता पहेली 4- ऊपर से नीचे बहता हूँ, हर बर्तन को अपनाता हूँ, देखो मुझको गिरा न देना वरना कठिन हो जाएगा… Read More »

आज का चुटकुला

कुछ दिन पहले मेरे पास एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई । यह किसी *दिब्या शर्मा* के नाम से थी । एक्सैप्ट करने से पहले मैने आदतन उसकी प्रोफाइल को चैक किया… तो पता चला अभी तक उसकी मित्रता सूची में कोई भी नहीं है । शक हुआ कि कहीं कोई फेक तो नहीं है । फिर सोचा नहीं…., हो सकता है फेसबुक ने इस यूजर को नया मानते हुए इसे मेरे साथ मित्रता करने के लिए सज्जेस्ट किया हो… खैर मैनें रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली। सबसे पहले उसकी ओर से धन्यवाद आया.. फिर मेरे हर स्टेटस को *लाईक और कमेंटस* मिलने… Read More »

पांच पहेलियाँ

पहेली 1 – मेरे चार पैर हैं फिर भी मैं चल नहीं सकती हूँ और न ही बिना हिलाए हिल सकती हूँ लेकिन मैं सबको आराम जरूर देती हूँ. बताओ मैं कौन हूँ ? पहेली 2 – मेरी आँखें हैं लेकिन मैं देख नहीं सकती हूँ. मेरे कान हैं लेकिन मैं सुन नहीं सकती हूँ. मेरी नाक है लेकिन मैं सूंघ नहीं सकती हूँ. मेरा मुँह भी है लेकिन मैं खा नहीं सकती हूँ. यहाँ तक कि मेरे हाथ और पैर भी हैं लेकिन फिर भी न मैं किसी को पकड़ सकती हूँ और न ही मैं चल सकती हूँ.… Read More »

चार पहेलियाँ

पहेली 1: सोने को पलंग नहीं न ही महल बनाए एक रूपया पास न फिर भी राजा कहलाए पहेली 2 : परिवार हरा हम भी हरे एक थैली में तीन – चार भरे। बताओ क्या ? पहेली 3: पांच अक्षर का मेरा नाम उल्टा पुल्टा एक समान पहेली 4: मुझमें ना बीज ना गुठली छिलका उतार के खा लो तो बताओ मेरा नाम ? उत्तर शेर मटर मलयालम केला

जोक्स नये नये

*एक आदमी किश्ते नही भर रहा था तो कुछ गुंडे घर पे* *आगये ओर चिल्लाने लगे* *दरवाज़ा खोल आज नही छोड़ेंगे* *वो नहा रहा था* *खिड़की से देखा कुछ नागा साधु जा रहे थे।* *पिछली खिड़की से कूद कर* *बिना वस्त्र के वो भी शामिल हो गया उनमे* *चलते 2 किसी साधु ने कंधे पे हाथ रखा और पूछा* *तुम्हारी कितनी किश्ते बाकी हैं*🤪 क्लास रूम में प्रोफेसर ने एक सीरियस टॉपिक पर चर्चा प्रारंभ की। . जैसे ही वे ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिखने के लिए पलटे तो तभी एक शरारती छात्र ने सीटी बजाई। . प्रोफेसर ने पलटकर सारी… Read More »

😜😜😂😂😂😁😁 हा हा हा हा हा हा हा हा

😜😜😂😂😂😁😁 “गुप्ता जी के पड़ोस में सत्यनारायण कथा की आरती हो रही थी, आरती की थाली गुप्ता जी के सामने आने पर, गुप्ता जी ने अपनी जेब में से छाँट कर कटा फटा दस रूपये का नोट कोई देखे नहीं, ऐसे डाला । वहाँ अत्यधिक ठसाठस भीड़ थी । गुप्ता जी के कंधे पर ठीक पीछे वाली आंटी ने थपकी मार कर गुप्ता जी की ओर 2000 रूपये का नोट बढ़ाया । गुप्ता जी ने उनसे नोट ले कर आरती की थाली में डाल दिया । गुप्ता जी को अपने 10 रूपये डालने पर थोड़ी लज्जा भी आई । बाहर… Read More »

नाग-पूजा- प्रेमचंद की कहानियाँ

प्रात:काल था। आषढ़ का पहला दौंगड़ा निकल गया था। कीट-पतंग चारों तरफ रेंगते दिखायी देते थे। तिलोत्तमा ने वाटिका की ओर देखा तो वृक्ष और पौधे ऐसे निखर गये थे जैसे साबुन से मैने कपड़े निखर जाते हैं। उन पर एक विचित्र आध्यात्मिक शोभा छायी हुई थी मानों योगीवर आनंद में मग्न पड़े हों। चिड़ियों में असाधारण चंचलता थी। डाल-डाल, पात-पात चहकती फिरती थीं। तिलोत्तमा बाग में निकल आयी। वह भी इन्हीं पक्षियों की भॉँति चंचल हो गयी थी। कभी किसी पौधे की देखती, कभी किसी फूल पर पड़ी हुई जल की बूँदो को हिलाकर अपने मुँह पर उनके शीतल… Read More »